Saloni gupta 22 Jan 2026 कविताएँ प्यार-महोब्बत माँ का संघर्ष ,कर्म,भागती दौड़ती ज़िन्दगी,बचपन,ख़ुशिया,अहमियत 7721 0 Hindi :: हिंदी
बचपन से बड़े होने तक कर्म करते देखा है एक आवाज़ में सबकी ज़रूरतों को पूरा करते देखा है खुद की फ़िक्र से पहले दूसरों की फ़िक्र करते देखा है मेने माँ को संघर्ष करते हुए देखा है। सुबह से भागतीं दोड़ती काम को सबसे पहले रखने वाली दूसरों के लिए जीवन जीने वाली अपनी अहमियत को खोते देखा है मेने माँ को संघर्ष करते देखा है सभी को खुश रखने वालीं सभी का अच्छा सोचने वाली दूसरों की ग़लतियों को नज़रअंदाज़ करने वाली खुद दूसरों से छल ओर कपट सहते देखा है मेने माँ को संघर्ष करते देखा है