संदीप कुमार सिंह 01 Aug 2023 कविताएँ धार्मिक मेरी यह कविता समाज हित में है। जिसे पढ़कर पाठक गण काफी लाभान्वित होंगें। 61984 6 5 Hindi :: हिंदी
(दोहा छंद) महिमा भोले नाथ की,जीवन में उत्साह। करके श्रम हम रात दिन,रखूं खुशी मय माह।। महिमा भोले नाथ की,दुनिया में है जोश। मानव आगे नित बढ़े,प्रगति रहे आगोश।। महिमा भोले नाथ की,चमके तब दरबार। गम सारे सब भूलकर,सेवा रखे सुमार।। महिमा भोले नाथ की,किए शिवम विषपान। किए बड़ा उपकार तो,तब है मानव मान।। महिमा भोले नाथ की,करे पाप संहार। मन चाहा वरदान दे,रखे भक्त से प्यार।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍️ जिला:_समस्तीपुर(देवड़ा)बिहार
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I am a writer and social worker.Poems are most likeble for me....