संदीप कुमार सिंह 01 Jul 2023 कविताएँ समाजिक मेरी यह कविता समाज हित में है। जिसे पढ़कर पाठक गण काफी लाभान्वित होंगें। 17383 0 Hindi :: हिंदी
कुंडलिया छंद महिमा तेरी खूब है,जाने सब संसार। माँ तेरे उपकार से, जीवन में है प्यार।। जीवन में है प्यार,नूर आँखों में रहता। माँ तुमसे ही आस,खून क्यों है यूं बहता। बंद करें संहार,ग्रहण करिए मधु अहिमा। करो प्रेम की वृष्टि,मातु की अनुपम महिमा।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍🏼 जिला:_समस्तीपुर(देवड़ा)बिहार
I am a writer and social worker.Poems are most likeble for me....