संदीप कुमार सिंह 03 Jul 2023 कविताएँ समाजिक मेरी यह कविता समाज हित में है। जिसे पढ़कर पाठक गण काफी लाभान्वित होंगें। 30985 0 Hindi :: हिंदी
(दोहा छंद) मन में सुरभित शांति हो, जीवन में हो ओज। पता नहीं किस मोड़ पर,पूर्ण सभी हो खोज।। पता नहीं किस मोड़ पर,मिल जाए अरु ज्ञान। जन्म मरण के भेद का,हो जाए निज भान।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍️ जिला:_समस्तीपुर(देवड़ा)बिहार
I am a writer and social worker.Poems are most likeble for me....