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मस्त कशिश में महक- है आकर्षण भी खूब

संदीप कुमार सिंह 08 Jul 2023 कविताएँ प्यार-महोब्बत मेरी यह कविता समाज हित में है। जिसे पढ़कर पाठक गण काफी रोमांचित होंगें। 21119 0 Hindi :: हिंदी

(मुक्तक छंद) 
मस्त कशिश में महक है,आकर्षण भी खूब।
पास चले आते सभी, लगती है महबूब।
गजब श्रृंगार में रहे, करती दिल पर राज_
कायल उसका है सभी, चाहत हो मंसूब।
(स्वरचित मौलिक)
संदीप कुमार सिंह✍🏼
जिला:_समस्तीपुर(देवड़ा)बिहार

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