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माता पिता के आंखों में आसू देखा नहीं करते

Danendra 27 Jun 2025 कविताएँ समाजिक 16645 0 Hindi :: हिंदी

डिग्री तो हाथों में है पर काम नहीं,
सपनों की आंखों में अब आराम नहीं।
हर चौखट पर देता हूँ दस्तक रोज़,
मगर किस्मत में शायद कोई नाम नहीं।
   घर की जिम्मेदारी में नीद आता नहीं
घुट घुट के जीने की राह में मेल खाता नहीं
मां पिता की आंखों में आंसू देखा जाता नहीं 

ट-घुट के जीने की राह में दिल बहलता नहीं,
हर मोड़ पे समझौता कर लेना हमें खलता नहीं।
माँ-बाप की आंखों में आँसू देखा नहीं करते,
इसलिए हर दर्द को भी मुस्कुरा के टालते हैं।

दर्पण में जब खुद को साहब बनते हैं पाते,
तो थकावट भी जैसे सर पर ताज बन जाती।
ऊँची उड़ानों के ख्वाब हम भी देखा करते,
पर हर उड़ान से पहले ज़मीन याद आती।

भीड़ में खोकर भी अकेले खड़े रहते हैं,
हर शाम उम्मीदों की चादर तले रहते हैं।
माँ-बाप की आंखों में आँसू देखा नहीं करते,
इसीलिए हर दिन खुद से लड़ते रहते हैं।

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