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मीरा जैसी प्रीत जब करे जगत के लोग- घर घर में खुशियाँ रहे होगा कभी न रोग

संदीप कुमार सिंह 29 Jul 2023 कविताएँ समाजिक मेरी यह कविता समाज हित में है। जिसे पढ़कर पाठक गण काफी लाभान्वित होंगें। 20309 0 Hindi :: हिंदी

(दोहा छंद)
मीरा जैसी प्रीत जब,करे जगत के लोग।
घर घर में खुशियाँ रहे,होगा कभी न रोग।।

अमर कहानी भक्ति की,जाने घर घर आज।
मीरा जैसी प्रीत पर,दुनियां को है नाज।।

मीरा जैसी प्रीत से,भक्ति हुई अति खास।
जिससे दुनिया आज भी,करे सुखद अहसास।।

मीरा खोई कृष्ण में,कण कण में वह देख।
मीरा जैसी भक्ति पर,लिखूं सरस मैं लेख।।

मीरा अनुपम दूत थी,मानवता की सीख।
मीरा जैसी भक्ति से,स्वर्ण बनी तारीख।।
(स्वरचित मौलिक)
संदीप कुमार सिंह✍️
जिला:_समस्तीपुर(देवड़ा)बिहार

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