संदीप कुमार सिंह 27 Jun 2026 कविताएँ समाजिक मेरी यह चार पंक्ति की मुक्तक कविता सामाजिक है जो समाज में प्यार-मोहब्बत को बरकरार रखने के लिए है. आप सभी अवश्य पढें. 2118 0 Hindi :: हिंदी
मोहब्बत से चलती है दुनिया। फिर सजती है मानव की गछिया। दौलत से नहीं ताकत से नहीं _ आपसी मेल से चलती दुनिया।l (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह*Author*
I am a writer and social worker.Poems are most likeble for me....