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मोहब्बत के नज़राने लेकर आया हूं- नाचते हुए खुद दूसरे को भी नचाने आया हूं।

संदीप कुमार सिंह 08 Aug 2023 कविताएँ प्यार-महोब्बत मेरी यह कविता समाज हित में है। जिसे पढ़कर पाठक गण काफी रोमांचित होंगें। 27276 0 Hindi :: हिंदी

मोहब्बत के नज़राने लेकर आया हूं,
नाचते हुए खुद दूसरे को भी नचाने आया हूं।

दिल टूट गया तो क्या हुआ?
दिल तो शीशे का होता है।

कुछ रिश्ते टूट गए तो क्या हुआ?
जो कच्चे धागे से बंधे हुए थे।

घुंघरू टूट गई तो क्या हुआ?
बिन पायल भी नाच तो लो।

मायावी इस दुनिया में पग_पग पर धोखा है,
औरों पर नहीं खुद पर विश्वास करना तो सीख।
(स्वरचित मौलिक)
संदीप कुमार सिंह✍️
जिला:_समस्तीपुर(देवड़ा)बिहार

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