संदीप कुमार सिंह 06 Aug 2023 कविताएँ समाजिक मेरी यह कविता समाज हित में है। जिसे पढ़कर पाठक गण काफी लाभान्वित होंगें। 29744 1 5 Hindi :: हिंदी
(छंद मुक्त कविता) निवेदन करता हूं दुनिया वालों से निवेदन करता हूं ऊपरवाले से। प्रेम भाव को बढ़ावा देते रहें तो, तो कठिनाइयों से सामना न हो। कण_कण में कुछ भाव जरुर विराजते हैं, उस भावों को समझने की कोशिश करें। फिर रक्त में खुशी भरी जोश का संचार होगा, फिर मानवों का कल्याण ही कल्याण होगा। नफरत भरी सोच को बाहर कर दें, मानव जाति का विकास हो ऐसा प्रयास करें। धरा पर जो मानव रूपी गुलशन है, इस गुलशन को और सुन्दर बनाएं तो अच्छा है। आज जो व्यापक रूप से घृणा फैली है, और इसकी जो परिणाम हैं घातक है। खुद से खुद का ही नुकसान कैसे कर सकते, एक बार तो अवश्य चिन्तन मनन करते। हां मानता हूं कुछ गड़बड़ भी हो जाती है, आपस में कभी_कभी अनबन भी ही जाती है। लेकिन इस गड़बड़ अनबन को भूल जाएं, और जीवन में प्यार भरा लड्डू खूब खाएं। हम आजाद हैं पर एक दायरा में, अच्छी पहल भरी सोच भरें जीवन में। अनमोल इस जीवन को सार्थक करें, बुरों का सर्वथा ही विरोध करें। कभी_कभी एक मुलाकात भी कहानी बन जाती है, जब रोज मुलाकात हो जीवन में अमृतवाणी भर जाती है। तो अपने अच्छे विचारों से रोज हम मुलाकात करें, और इस दुनियां में सुरभित विचारों के शब्द भरें। मैंने तो अपनी सोच को शब्दों में उतार लिया, और लोगों के सम्मुख पेश भी कर दिया। चाहता हूं इस हसीन दुनियां को और हसीन करूं, नफरत की जगह प्यार का रंग भरूं। कुछ तो भरपूर मजा में जिन्दगी गुजारते हैं, कुछ को जिन्दगी भर कुछ न कुछ समस्या है। फितरत जो जमी है फितरत को दूर करना है, एक नई विकसित फितरत लोगों में भरना है। मेरे फिसलने पर पड़ोसी को खुशी होती है, पड़ोसी के फिसलने पर हमें खुशी होती है। तो अब ऐसा न हो हम मददगार बनें, एक_दुसरे के दुखों को खुशियों से बांट लें। मुझे विश्वास है यह धरा किसी स्वर्ग से कम नहीं, बस अपने कर्मों से इसे और सुगंधित करना है। अपने पुरखों के इतिहास को पढ़ना है, फिर मनन कर एक नया इतिहास लिखना है। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍️ जिला:_समस्तीपुर(देवड़ा)बिहार
2 years ago
I am a writer and social worker.Poems are most likeble for me....