संदीप कुमार सिंह 14 Jul 2024 कविताएँ समाजिक मेरी यह कविता समाज हित में है, जिसे पढ़कर आप लोग अवश्य लाभान्वित होंगें. 47700 0 Hindi :: हिंदी
पानी पानी हो रहा, मौसम है बरसात। सावन भी अब जोर में, हुई सुहानी रात।। पानी पानी हो रहा,भले लोग जो आज। निर्लज खाया लाज को,करता भी है राज।। पानी पानी हो रहा,शहर गांव सब यार। अच्छा तथा खराब भी,खुशियों में कचनार।। पानी पानी हो रहा,मानवता का मोल। मौका रहे तलाश में,दुर्जन हैं विश घोल।। पानी पानी हो रहा,रहे निर्लोभ शांत। लोभी को बरसात में,भी है दृढ़ नव कांत।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍️ जिला:_समस्तीपुर(देवड़ा)बिहार
I am a writer and social worker.Poems are most likeble for me....