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पंचामृत

Rambriksh Bahadurpuri 30 Jun 2026 कविताएँ धार्मिक #पंचामृत पर रचना#रामवृक्ष बहादुरपुरी की पंचामृत पर कविता 949 0 Hindi :: हिंदी

॥ पावन पंचामृत ॥
​क्षीर-सिंधु सा सुश्वेत, दूध पावनता का हेतु,
भक्ति का बढ़ाता सेतु, आत्म-तृप्ति-दाता है।
दही की सुघड़ता से, जीवन में स्थिरता आए,
चित्त को प्रफुल्लित करे, सुख उपजाता है॥
​घृत की सुवास जैसे, तेज का प्रकाश फैला,
बुद्धि-बल-वर्धक जो, ओज को बढ़ाता है।
मधु की मधुरता से, वाणी में मिठास घोले,
जीवन का कटु-रस, पल में मिटाता है॥
​शर्करा मिलाए रस, आनंद अखंड देवे,
पंच तत्व मिल के, 'अमृत' कहाता है।
चरणों में देव के, जो अर्पित हो जाए भव्य,
'पंचामृत' वही भाग्य, जीव का जगाता है॥

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