संदीप कुमार सिंह 29 Jun 2026 कविताएँ समाजिक मेरी यह कविता (साहस का फूल बरसात की एक रात)बुहत ही बारीकी से आप को हर बुरी और अच्छी परिस्थितियों से जुझने के लिए फूल स्वरूप सहास प्रदान करती रहेगी. 1486 0 Hindi :: हिंदी
साहस का फूल जब खिलता है तो पत्थर में भी फूल खिलते। ढूँढ़ों तो मतलबी ज़माने में भी जीने के उसूल मिलते । सीखना समझना जरुरी है अनुभव लेना जरुरी है हमको-- याद रखें गुलाब पाते हो तो गुलाब के साथ शूल मिलते ।। जिंदगी अति हसीन है इसे यूँ दिखावे में जाया मत करो । चंडालों के शहर शौक पाल कर भूले से आया मत करो । मंजिल दर मंजिल मंजिलों का सुंदर मकान बनाओ राही -- जीवन के संघर्षों में खेल में वक्त को गँवाया मत करो ।। सफलताओं का भव्य नाम बनकर ही सबके सामने आओ । कोशिश करने वाला वीर बनकर ही सबके सामने आओ। दुनियाँ शिखर पर ही बैठे लोगों को सदा सलाम करती है-- मरी मानवता को जिन्दा करने ही सबके सामने आओ ।। ऐसा लगता अब तो धोखा देना लोगों का शौक बन गया । बेवफाई के शिकार कितने आशिक दर्द से बौक बन गया। लेकिन रूक जाना अपना लक्ष्य नहीं है आगे बढ़ना है-- अक्सर झूठ बोलना भी लोगों का अब जैसे ज़ौक़ बन गया।। आसमान हमको चुनौती दे रहा है और समझो सृष्टि को । ले कर जो आती सौगातें कहती और खोज करो वृष्टि को । माया में फंसे लोग को मुक्ति का पथ दिखाने आगे आओ -- नजरिया साफ रखो तब शब्द के अर्थ से तेज रखो दृष्टि को।। उस शक्ति को नमन है बार -बार जिस ने बनाई संसार को । अतीत गवाह है लड़ने के बाद भी सबने माना प्यार को । इबादत होता है कर्म की परीक्षा से गुजरना तो गुजरो -- कुछ सृजन ऐसा खास करना की काम मिल जाये बेकार को।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह*Author*
I am a writer and social worker.Poems are most likeble for me....