संदीप कुमार सिंह 04 Aug 2023 कविताएँ समाजिक मेरी यह कविता समाज हित में है। जिसे पढ़कर पाठक गण काफी लाभान्वित होंगें। 25047 0 Hindi :: हिंदी
(दोहा छंद) पीड़ा सहकर आदमी,करते अनुपम काम। करती दुनिया नाज भी,रखते लब पर नाम।। पीड़ा सहकर आदमी,करे दूर तम यार। लाते है फिर चाँदनी,करते हैं उपकार।। पीड़ा सहकर आदमी,रोशन करते जन्म। बड़ी बड़ी फिर खोज कर,पाते हैं बहु मन्म।। पीड़ा सहकर आदमी,सुखी रखे परिवार। पूर्ण करे कर्तव्य को,पाते हैं अधिकार।। पीड़ा सहकर आदमी,खुशी दिखाए रूप। औरों को भी खुश करे,बनते जैसे कूप।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍️ जिला:_समस्तीपुर(देवड़ा)बिहार
I am a writer and social worker.Poems are most likeble for me....