संदीप कुमार सिंह 10 Jul 2024 कविताएँ समाजिक मेरी यह कविता समाज हित में है. इसे पढ़कर आप लोग अवश्य लाभांवित होंगे. 29008 0 Hindi :: हिंदी
जिस मोड़ पर सब लूट जाता है। अपना भी पराया हो जाता है। उस मोड़ से भी हम गुजरे हैं_ फिर हौसला ही साथ दे जाता है।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍️
I am a writer and social worker.Poems are most likeble for me....