अंकलेश भाटोतरा 28 Jan 2025 कविताएँ अन्य 21306 0 Hindi :: हिंदी
जो कमीज के बीच फटी बनियान छुपा देता है
वो पिता होता है
जो अपने आसुओ को आँखो से बाहर नहीं आने देता
वो पिता होता है
वो अपने बच्चों की हर जिद को पूरा करता है
वो पिता होता है
जो जीवन भर कर्ज का बोझ लिए फिरता है
वो पिता होता है
जो अपनी बीमारी भी किसी को नहीं बता पता है
वो पिता होता है
जो अपनी ख्वाइशो वो पूरा नहीं क़र पता है
वो पिता होता है
जो चाह क़र भी खुल के नहीं रो सकता है
वो पिता होता है
जो पत्थर रूपी ह्रदय लेके जीता है
वो पिता होता है
जो एक एक पसीने की बून्द से मकान बनाता है
वो पिता होता है
जिनकी हम पसीने की एक बून्द की भी कीमत चूका नहीं सकते
वो पिता होता है