संदीप कुमार सिंह 08 Oct 2023 कविताएँ समाजिक मेरी यह कविता समाज हित में है। जिसे पढ़कर पाठक गण काफी लाभान्वित होंगें। 22178 3 5 Hindi :: हिंदी
#विधा:_रोला छंद #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" रावण थे अति वीर,चली कभी न मनमानी। उसको था वरदान,दिए शिव थे जो दानी।। हुआ उसे अभिमान,हरण कर आया सीता। करवाया संहार,किया काम न तब मीता।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍️ जिला:_समस्तीपुर(देवड़ा)बिहार
2 years ago
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I am a writer and social worker.Poems are most likeble for me....