संदीप कुमार सिंह 11 Nov 2023 कविताएँ समाजिक मेरी यह कविता समाज हित में है।जिसे पढ़कर पाठक गण काफी लाभान्वित होंगे। 24193 0 Hindi :: हिंदी
#विधा:_मुक्तक छंद #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" रहिए सदा उदार मन, करिए कभी न लोभ। खुशियों की बरसात हो, दूर रहे तब छोभ। सपने सब मंसूब हो,फैले जग में नाम_ दुनिया में विख्यात बन, अनुपम अदभुत शोभ। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍️ जिला:_समस्तीपुर(देवड़ा)बिहार
I am a writer and social worker.Poems are most likeble for me....