संदीप कुमार सिंह 25 Nov 2023 कविताएँ समाजिक मेरी यह कविता समाज हित में है।जिसे पढ़कर पाठक गण काफी लाभांवित होंगें। 26951 0 Hindi :: हिंदी
#विधा:-दोहा छंद #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" सारे बंधन तोड़कर,करूं हिफाजत देश। जीवन मेरा दैश का,जिसमें है प्रभु लेश।। सारे बंधन तोड़कर , खूब करेंगे प्यार। असल जिन्दगी प्यार में,करूं नहीं तकरार ।। सारे बंधन तोड़कर, लाऊँ भव्य बहार। गम लेने का शौक है,देता हूँ बस प्यार ।। सारे बंधन तोड़कर,बना रहूं अवधेश। दे दूं तन-मन देश को,रहे खुशी में देश।। सारे बंधन तोड़कर,बुलंद कर आवाज। हम अपने हक के लिए,करूं नवल आगाज।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍️ जिला:-समस्तीपुर(देवड़ा)बिहार
I am a writer and social worker.Poems are most likeble for me....