संदीप कुमार सिंह 03 Aug 2023 कविताएँ समाजिक मेरी यह कविता समाज हित में है। जिसे पढ़कर पाठक गण काफी लाभान्वित होंगें। 21936 0 Hindi :: हिंदी
(दोहा छंद) सबकी बेटी एक सी,ऐसी रखें निगाह। जिससे रौनक है यहां,निकले कभी न आह।। सबकी बेटी एक सी,इसको रखिए याद। दुनिया लगे हसीन तब,जाए बन अनुनाद।। सबकी बेटी एक सी,खुशबू मय संसार। ऐसी जिनकी भावना,उनसे ही है प्यार।। सबकी बेटी एक सी,ऐसा रखें विचार। तब जग यह गुलजार हो,सरस रहे व्यवहार।। सबकी बेटी एक सी,जिससे है अरु आब। हम सब दें सम्मान तो,बने भव्य महताब।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍️ जिला:_समस्तीपुर(देवड़ा)बिहार
I am a writer and social worker.Poems are most likeble for me....