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सच्चाइयां

Raj Ashok 21 May 2024 कविताएँ हास्य-व्यंग सच्चाइयां 37248 0 Hindi :: हिंदी

जीवन की ये सच्चाईयां ।
हमेशा कुछ ना कुछ कह जाती है।।
अक्सर,हर बात वो अधूरी रहती है ।
क्यों............?
जीवन की इस डोर में अब रिश्तों के 
धागे बड़े कच्चे हैं।।
अब वचनबद्ध नहीं है ‌। लोग 
अपनी ही जुबां से मुकर जाते हैं। ।
सच में 
अपने ही कहें शब्द से उखड़ जाते हैं ।।
अब दौर नहीं जमाने बदल रहे है।।
अक्सर दिल से चाहने वाले बदल रहे हैं।..........
बागवां देख तेरे माली को 
क्यों .......?
फटेहाल ज़िन्दगी में  रहता है।!
इस की मेहनत ने तो खूब 
गुल खिलाए हैं ।
जब भी लोग.......!
मोहब्बत की पहली एक नजर से मिलने आए 
तो एक फूल ही लाए हैं ।।
पर क्या तब वो फुल खिले या मुरझाए
ओर सवालों को जाने दो 
ज़िन्दगी पर कर्ज है ।
अब मेरे हक़ का .............?

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