Join Us:
दिशा-लाइव ग्रुप ने लॉन्च किया नया ब्रांड BizPry - लोकल से ग्लोबल तक 20 मई स्पेशल -इंटरनेट पर कविता कहानी और लेख लिखकर पैसे कमाएं - आपके लिए सबसे बढ़िया मौका साहित्य लाइव की वेबसाइट हुई और अधिक बेहतरीन और एडवांस साहित्य लाइव पर किसी भी तकनीकी सहयोग या अन्य समस्याओं के लिए सम्पर्क करें

समझ सका है कौन यह- होता क्यों तकरार

संदीप कुमार सिंह 29 Jan 2024 कविताएँ समाजिक दोहा कविता, दिल को जो छू ले ऐसी कविता, ज्ञान वर्धन कविता, दोहा, कुंडलिया, मुक्तक, कहानी, रोला, ग़ज़ल, छंद. 49337 0 Hindi :: हिंदी

समझ  सका  है  कौन  यह, होता  क्यों  तकरार।
बात-बात  में  ही करे,लोग  आज  के  मार।।

कोई  समझ  न  यह  सके, कलियुग  का  यह  खेल।
जलते  जन-जन  मेल  पर,देते  कर  बेमेल।।

मानवता  का  ह्रास है, मतलब के  सब  यार।
तभी कष्ट  भी  खूब है,जिन्दा   लगे  मजार।।

अपने दुख  पर  ध्यान  मत,देता  वही  सलाह।
बड़ी हास्य  है  बात यह, खुद  हो  के  गुमराह।।

जो  समझे  सो  ठीक है,मूढ़  करे  अभिमान।
झेले  कर  तकलीफ  को, याद  करे  भगवान।।
(स्वरचित मौलिक)
संदीप कुमार सिंह✍️
जिला:-समस्तीपुर(देवड़ा)बिहार

Comments & Reviews

Post a comment

Login to post a comment!

Related Articles

शक्ति जब मिले इच्छाओं की, जो चाहें सो प्राप्त कर लें। आवश्यकताएं अनन्त को भी, एक हद तक प्राप्त कर लें। शक्ति जब मिले इच्छाओं की, असम्भ� read more >>
शक्ति जब मिले इच्छाओं की, जो चाहें सो हांसिल कर कर लें। आवश्यकताएं अनन्त को भी, एक हद तक प्राप्त कर लें। शक्ति जब मिले इच्छाओं की, आसमा read more >>
इच्छा शक्ति 🥀🥀 शक्ति जब मिले इच्छाओं की, जो चाहें सो हांसिल कर कर लें। आवश्यकताएं अनन्त को भी, एक हद तक प्राप्त कर लें। शक्ति जब मिल� read more >>
Join Us: