संदीप कुमार सिंह 27 Jun 2026 कविताएँ प्यार-महोब्बत चार पंक्ति की मेरी यह मुक्तक कविता आपसी प्यार-भाव, सामाजिक प्रेम को बढ़ावा तथा साहित्य को जिंदा करने के लिए पर्याप्त है. 2260 0 Hindi :: हिंदी
सपनो की परी बन जब तुम सामने आती हो। रेशमी वस्त्रों में लिपटी अति झिलमिलाती हो। जन्नत सा नजारा का दर्शन कर मैं होता खुश_ बेपनाह मोहब्बत मुझको तुम दे जाती हो।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह*Author*
I am a writer and social worker.Poems are most likeble for me....