Bablu Verma 29 May 2025 कविताएँ समाजिक Stree kavita,kavita,bablu kavita,bablu verma ki kavita stree,bablu verma,bablu lakhimpur,bablu allahabad,stree kavita,pidit stree,shoshit stree 14233 0 Hindi :: हिंदी
संसार बड़ी ही सुंदर काया तरह-तरह के लोग यहां पर कुछ वैश्यी दरिन्दे भी रहते धूर्त नशे में वो रहते है। कर शोषण स्त्री का, उसके प्राणों को हरते है कौन इन्हें समझाये वह स्त्री है, मनोरंजन का सामान नहीं स्त्री ही है पालनहारी, स्त्री ही मातु तुम्हारी नौ महीने रख कर कोख मे तुमको सारे कष्टों को सहती है अपने जीवन को त्याग-त्याग वह तुमको जीवन देती है।