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सीख लिया है जग में जीना

संदीप कुमार सिंह 04 Jun 2026 कविताएँ समाजिक मेरी यह मुक्तक कविता समाज में पर्याप्त दुष्ट लोगों से सावधान रह कर आप अपनी मंजिल को प्राप्त कर सकते हैं. 629 0 Hindi :: हिंदी

सीख  लिया  है  जग  में  जीना,सीख  लिया  है  प्यारl
प्यार  बिना  भी  क्या  जीना  है,प्यार  जगत  आधार l
नहीं  प्यार  को  जो  रखता  है,होता  है  कंगाल=
जैसे  को  तैसा  है मिलता,स्वर्ग  बना  परिवार ll
(स्वरचित मौलिक)
संदीप कुमार सिंह*Author*

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