SHUBHAM PATHAK 31 Jul 2026 कविताएँ प्यार-महोब्बत 3324 0 Hindi :: हिंदी
सिर्फ़ तुम... मेरा प्यार हो तुम, मेरी जान हो तुम, मेरे हर सपने का सबसे खूबसूरत अरमान हो तुम। मेरी आँखों में बसने वाली रोशनी हो तुम, मेरे माथे का गर्व, मेरा अभिमान हो तुम। तुम्हारे बिना हर खुशी अधूरी लगती है, हर हँसी कहीं खोई-सी लगती है। लोग कहते हैं ज़िंदगी बहुत खूबसूरत है, पर मुझे तो ज़िंदगी तभी खूबसूरत लगती है, जब उसमें तुम्हारी मुस्कान शामिल होती है। मेरी हर सुबह तुम्हारे नाम से शुरू होती है, हर शाम तुम्हारी यादों में ढल जाती है। रात का हर तारा तुम्हारा चेहरा बन जाता है, और चाँद भी तुम्हारी सादगी के आगे फीका पड़ जाता है। तुम सिर्फ़ मेरी मोहब्बत नहीं, मेरी इबादत हो। तुम सिर्फ़ मेरी चाहत नहीं, मेरी पूरी कायनात हो। तुम्हारे बिना मैं वैसा ही हूँ, जैसे बिना पानी की नदी, बिना खुशबू का फूल, बिना धड़कन का दिल। जब तुम साथ होती हो, तो हर मुश्किल आसान लगती है। बिखरी हुई ज़िंदगी भी एक खूबसूरत कहानी बन जाती है। तुम्हारी हँसी मेरे लिए दुआ है, तुम्हारी आवाज़ मेरे लिए सुकून है, और तुम्हारा साथ... मेरे जीने की सबसे बड़ी वजह है। मैंने रब से दौलत नहीं माँगी, शोहरत नहीं माँगी, बस एक दुआ की है— हर जन्म में तुम्हारा हाथ मेरे हाथ में रहे, हर सफ़र में तुम्हारा साथ मेरे साथ रहे। अगर कभी मेरी साँसें मुझसे रूठ जाएँ, तो आख़िरी पल में भी तुम्हारा नाम मेरे होंठों पर हो। अगर अगला जन्म सच में होता है, तो फिर से उसी रब से तुम्हें ही माँगूँगा। क्योंकि... मेरा प्यार तुम हो, मेरी जान तुम हो, मेरा अभिमान तुम हो। तुम्हारे बिना मैं अधूरा नहीं... मैं तो जैसे हूँ ही नहीं। क्योंकि मेरी धड़कनों का हर सुर तुम हो, मेरी प्रार्थनाओं का हर शब्द तुम हो, मेरी ज़िंदगी की हर ख़ुशी, हर उम्मीद, हर मंज़िल... सिर्फ़ और सिर्फ़ तुम हो। ❤️ ✍️✍️✍️ शुभम पाठक ✍️✍️✍️