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सोचो ज़रा ये क्यों बनाया, बंदूकों को अपना गहना

Alok ks 21 Jun 2026 कविताएँ देश-प्रेम Poetry kavita hindi साहित्यकविता कविता हिंदी साहित्य 8938 0 Hindi :: हिंदी

न समझो तुम कैसा देश है,
बिहार की गाथा अजीब है।
अपराधी का वह मज़हब है,
सत्ता में बैठे राम का भक्त।

भ्रष्ट पर जो आवाज़ उठाया,
मृत शरीर को जगाने वाला,
भरत, तुम आतंकी कहलाया,
देश के प्रति सोच रखने वाला।

गरीब, लाचार का आँसू पोंछना,
हमारे राजा को वो नहीं भाया।
टूट न जाए चारपाई का पैर कहीं,
वीर योद्धा को पागल कह दिया।

सोचा क्यों नहीं एक बार राजा,
आँखों में क्यों डर नहीं उसके राजा?
माँ का आँचल अब तो मैला हुआ,
बहन का काजल तू धो गया राजा।

आँखों में उसकी अंगार था,
ख़्वाबों में उसका एक सपना,
सोचो ज़रा ये क्यों बनाया,
बंदूकों को अपना गहना।

© Alok ks
19/06/2026

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