Rajnish khandal 05 Apr 2025 कविताएँ धार्मिक shreeram 20594 0 Hindi :: हिंदी
जब धरती पर धर्म का नाश हुआ,
तब राम रूपी प्रकाश हुआ।
तब भाग्य अवध के उदय हुए,
जब मर्यादा पुरूषोत्तम प्रकट भए।
प्रकृति तब प्रफूल्लित भई और,
धर्म रूपी पुष्प फुले - फले।
अधर्मी सब भयभीत भए,
और विनाश के अपने निकट चले।
यू ही नहीं पूजे जाते वो,
अपनी मर्यादाओं से पुरुष उत्तम बने।
नारी शक्ति की अखण्डता की खातिर वो, समुंद्र पर सेतु बांध चले।
और नाश किया उस अधर्मी का जिसने मर्यादाओं को त्यागा था।
राम-लखन को दूर भेज माँ सीता को ले भागा था।
श्री राम से बेरता बांध चला वो,
रावण बड़ा अभागा था।
अहंकार ने उसको जकड़ लिया और,
भाई को अपने त्यागा था।
हर नर में राम है भारत के,
और नारी में अभी तक सीता है।
जन - जन के हित में कर्म किये थे,
ये यू ही नहीं गया जाता हैं।
इस सृष्टी के संचालक होकर भी,
मानव की भांति जीवन गुजारा था,
पिता की आज्ञा से वनवास भोगकर,
कंद - मूल को खाया था।
जब राम नवमी का उत्सव हो, मिलकर के सारे खूब मनाना।
ये विश्व भोम का उत्सव है,विचारो को उनके खूब बढ़ाना।
जय श्री राम! 🚩🚩
~रजनीश खाण्डल