संदीप कुमार सिंह 04 Oct 2023 कविताएँ समाजिक मेरी यह कविता समाज हित में है। जिसे पढ़कर पाठक गण काफी लाभान्वित होंगें। 32385 0 Hindi :: हिंदी
#विधा:_दोहा छंद #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" तेरे अपने कर्म से, तेरा हो कल्याण। बढ़ते जाएं फिर सतत ,बनकर सबल कृपाण।। तेरे अपने कर्म से, जीवन में हो रंग। खुशियाँ देने से मिले,सबका ही तब संग।। तेरे अपने कर्म से,पूछे जगत जहान। हाथों में जब हो कला,मिलते सभी निदान।। तेरे अपने कर्म से,जीवन हो अनमोल। खुद से कर संघर्ष तो,हरदम रहे कलोल।। तेरे अपने कर्म से,अदभुत मिले प्रकाश। कायनात भी साथ दे,छू ले तब आकाश।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍️ जिला:_समस्तीपुर(देवड़ा)बिहार
I am a writer and social worker.Poems are most likeble for me....