Dr.sandeep kumar 30 Jul 2026 कविताएँ हास्य-व्यंग #पेड़#पेड़ मत काटो#पेड़ लगाओ 4685 0 Hindi :: हिंदी
तुम पेड़ मत लगाओ तुम पेड़ मत लगाओ। उग आए हैं जो स्वतः ही, नहीं उन्हें मिटाओ। तुम पेड़ मत लगाओ। तुम पेड़ मत लगाओ। मनुज नहीं था जब धरती पर यह तो हरी भरी थी। पेड़ों और नदी- झरनों से, शुद्ध हवा बहती थी मानव मन में लालच आया, है पेड़ों को काटा। तब से ही इस धरती पर हरियाली का घाटा। लालच ,मोह की दुष्वृत्ति को मन से सभी हटाओ, तुम पेड़ मत लगाओ तुम पेड़ मत लगाओ। बंजारों -सा जीवन था जब, प्रकृति थी बनी सहाय। आज संसाधनों को खा रही , लोभी मनुज की हाय। पेड़ों में बस धन है दिखता, भूमि में दौलत भारी। बस ऐसे स्वारथ लालच में, मानव मति है मारी। धन के भूखे इस दानव को मन से सभी हटाओ तुम पेड़ मत लगाओ तुम पेड़ मत लगाओ। जागो इससे पहले कि धरा, बंजर ही हो जाए। देखा ना जाए आंखों से, वो मंजर हो जाए। धरती मांँ है, मांँ का आदर, करना हमको होगा। नहीं तो जीते जी सभी को , यूं ही मरना होगा। मन्दबुद्धि यह बात न माने इनको तो समझाओ तुम पेड़ मत लगाओ तुम पेड़ मत लगाओ।