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तुम्हारी तारीफ

SHUBHAM PATHAK 06 Jun 2026 कविताएँ प्यार-महोब्बत 336 0 Hindi :: हिंदी

तुम्हारी तारीफ़ में...
तुम्हें देखा तो लगा जैसे,
फूलों ने रंग तुमसे पाए हों,
चाँद ने अपनी चाँदनी का,
कुछ अंश तुममें सजाए हों।
तुम्हारी मुस्कान की बात करूँ,
या आँखों की गहराई लिख दूँ,
अपने मन की हर कोमल धड़कन,
तुम्हारी ही परछाई लिख दूँ।
तुम चलती हो तो लगता है,
मौसम भी ठहर-सा जाता है,
तुम हँस देती हो तो जैसे,
हर चेहरा खिल-सा जाता है।
न कोई दावा, न कोई चाहत,
न कोई इज़हार की बात है,
बस इतना कहना अच्छा लगता,
तुममें एक अलग सी बात है।
तुम सादगी की ऐसी मूरत,
जिसमें सुंदरता बसती है,
जैसे मंदिर के दीपक में,
शांत सुनहरी ज्योति हँसती है।
तुम्हारा नाम न लूँ फिर भी,
हर शब्द तुम्हारा हो जाता है,
मन का कोरा कागज़ भी,
तुम पर कविता लिख जाता है।
तुम सुबह की पहली किरण सी,
जो अंधियारा हर लेती है,
थके हुए मन की राहों में,
नई उमंग भर देती है।
तुम बरसात की पहली बूँद सी,
धरती को महका जाती हो,
बिन कुछ कहे ही अपनेपन का,
अहसास करा जाती हो।
तुम्हारी बातें ऐसी लगती हैं,
जैसे वीणा के मधुर सुर हों,
जिन्हें सुनकर मन कह उठता है,
काश ये पल थोड़े और हों।
तुममें कोई शोर नहीं दिखता,
फिर भी सबसे अलग लगती हो,
भीड़ भरी इस दुनिया में भी,
अपनी सी क्यों लगती हो?
तुम्हारी सादगी का जादू,
हर दिखावे पर भारी है,
कुछ चेहरे सुंदर होते हैं,
पर तुममें खूबसूरती से बढ़कर ख़ूबसूरत किरदार भी है।
जब तुम हँसती हो तो लगता है,
जैसे फूलों की बरसात हुई,
और जब तुम चुप रहती हो,
तब भी मन में कोई बात हुई।
न जाने कितनी कविताओं ने,
तुमसे शब्द उधार लिए होंगे,
न जाने कितने सपनों ने,
तुमसे अपने रंग लिए होंगे।
रब ने बड़ी फुर्सत में शायद,
तुम्हारा व्यक्तित्व सँवारा है,
रूप दिया, मुस्कान दी,
और दिल में अपनापन उतारा है।
तुम्हें देखकर यही लगता है,
दुनिया अब भी सुंदर है,
सच्चाई, सरलता और मुस्कान का,
अस्तित्व अभी भी अंदर है।
रब से बस इतनी प्रार्थना है,
हर दिन तुम्हारा ख़ास रहे,
होठों पर मुस्कान सजी रहे,
जीवन में मधुमास रहे।
दुनिया देखे रूप तुम्हारा,
मैं तो यह सम्मान करूँ,
तुम जैसी हो वैसी ही रहना,
बस इतनी सी पहचान करूँ।
और जब कभी वर्षों बाद भी,
इन बातों का ज़िक्र आएगा,
तब याद रहेगा कि इस दुनिया में,
एक चेहरा ऐसा भी था,
जिसकी तारीफ़ में लिखे गए शब्द,
कभी पूरे नहीं हो पाएँगे... 🌹✨।

शुभम पाठक ✍️✍️

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