Join Us:
दिशा-लाइव ग्रुप ने लॉन्च किया नया ब्रांड BizPry - लोकल से ग्लोबल तक 20 मई स्पेशल -इंटरनेट पर कविता कहानी और लेख लिखकर पैसे कमाएं - आपके लिए सबसे बढ़िया मौका साहित्य लाइव की वेबसाइट हुई और अधिक बेहतरीन और एडवांस साहित्य लाइव पर किसी भी तकनीकी सहयोग या अन्य समस्याओं के लिए सम्पर्क करें

उन कटे दरख्तों से लिपटकर कोई रोता है

NEM SINGH RAJPUT SARFIRA 08 Oct 2025 कविताएँ दुःखद 20495 0 Hindi :: हिंदी

उन कटे दरख्तों से लिपटकर कोई रोता है 
हाथ जोड़कर रोते-रोते कुछ कहता है 

           हमें माफ कर दो
                 और 
       दर्द सहन नहीं होता है 

         बड़ा दुख दिया था हमने तुमको
 वही दुख दर्द बन कर आज हमको होता है 

          बहे थे आंसू तुम्हारे 
             जब चली थी 
            कुल्हाड़ी हमारी 
      बड़ी बेरहमी से काटा था
                हमने तुमको 
उस दर्द का एहसास आज हमको होता है
हमें माफ कर दो अब दर्द सहन नहीं होता है 

उन कटे दरख्तों से लिपटकर कोई रोता है
हाथ जोड़कर रोते-रोते कुछ कहता है 
          हमें माफ कर दो 
    अब दर्द सहन नहीं होता है

Comments & Reviews

Post a comment

Login to post a comment!

Related Articles

शक्ति जब मिले इच्छाओं की, जो चाहें सो प्राप्त कर लें। आवश्यकताएं अनन्त को भी, एक हद तक प्राप्त कर लें। शक्ति जब मिले इच्छाओं की, असम्भ� read more >>
शक्ति जब मिले इच्छाओं की, जो चाहें सो हांसिल कर कर लें। आवश्यकताएं अनन्त को भी, एक हद तक प्राप्त कर लें। शक्ति जब मिले इच्छाओं की, आसमा read more >>
इच्छा शक्ति 🥀🥀 शक्ति जब मिले इच्छाओं की, जो चाहें सो हांसिल कर कर लें। आवश्यकताएं अनन्त को भी, एक हद तक प्राप्त कर लें। शक्ति जब मिल� read more >>
Join Us: