NEM SINGH RAJPUT SARFIRA 08 Oct 2025 कविताएँ दुःखद 20495 0 Hindi :: हिंदी
उन कटे दरख्तों से लिपटकर कोई रोता है
हाथ जोड़कर रोते-रोते कुछ कहता है
हमें माफ कर दो
और
दर्द सहन नहीं होता है
बड़ा दुख दिया था हमने तुमको
वही दुख दर्द बन कर आज हमको होता है
बहे थे आंसू तुम्हारे
जब चली थी
कुल्हाड़ी हमारी
बड़ी बेरहमी से काटा था
हमने तुमको
उस दर्द का एहसास आज हमको होता है
हमें माफ कर दो अब दर्द सहन नहीं होता है
उन कटे दरख्तों से लिपटकर कोई रोता है
हाथ जोड़कर रोते-रोते कुछ कहता है
हमें माफ कर दो
अब दर्द सहन नहीं होता है