संदीप कुमार सिंह 11 Oct 2023 कविताएँ समाजिक मेरी यह कविता समाज हित में है।जिसे पढ़कर पाठक गण काफी लाभान्वित होंगें। 31602 0 Hindi :: हिंदी
#विधा:_कुंडलिया छंद #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" उनको भी तो हो पता,मुझको उनसे प्यार। एक जरा सी भूल हो,कर दूं मैं इजहार।। कर दूं मैं इजहार,अलग दिखती है सबसे। आती हरदम याद,मिली पहले थी जबसे।। कहते कवि संदीप,प्यार होता है जिनको। रहते हैं बेताब,कहे प्रेमी सब उनको।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍️ जिला:_समस्तीपुर(देवड़ा)बिहार
I am a writer and social worker.Poems are most likeble for me....