वंदना स्तुति 16 Apr 2023 कविताएँ समाजिक वाह रे इंसान ! तू भी क्या खूब फर्ज निभाता है।। 47089 0 Hindi :: हिंदी
वाह रे इंसान ! तू भी क्या खूब फर्ज निभाता है।
इंसानियत को रौंद के,मंदिर में जाता है ।
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भूखे,निर्धन की भूख मिटाने से पल पल तू कतराता है,
पत्थर के नाम पर छप्पन भोग लगाता है ।
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अबला अकेली देख कर, निः वस्त्र उसे बनाता है,
पत्थर की देवी को चुनरी चढ़ाने जाता है ।
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वाह रे इंसान ! तू भी क्या खूब फर्ज निभाता है।
इंसानियत को रौंद के,मंदिर में जाता है ।।