MUKESH KUMAR DHODHAWAT 16 Aug 2025 कविताएँ अन्य ये दुनिया दोनों तरफ बोलती है आज की बात को कल बोलती हैं 12307 0 Hindi :: हिंदी
आज की बात को कल बोलती हैं ये दुनिया दोनों तरफ बोलती हैं चांद मैं भी दाग बता देती है ठिकाना नहीं है खुद का पर बात सभी की करती हैं अपना मतलब निकाल कर सबको दरकिनार करती हैं पर हमारी गलती में भी हमको सही बोलती हैं ये दुनिया दोनों तरफ बोलती है आज की बात को कल बोलती हैं कान में कचरा बताकर बात सारी सुन लेती हैं देखने को आए तो दुनिया देख लेती हैं जख्म सबके पता है उसको पर घाव पर नमक रगड़ देती हैं हा सही है हा सही है बार बार कह देती हैं ये दुनिया दोनों तरफ बोलती है आज की बात को कल बोलती हैं हमारे जहन में हमने सबके लिए प्रेम समझा वो भी हमें प्रेम समझाया करती हैं धारा की नाव को मजबूत बता कर दो नाव में पाव रखवा देती हैं तैरना आता है उसको ऐसा विश्वास दिला देती हैं पर खुद नाव में बैठ कर हमको डुबाया करती हैं ये दुनिया दोनों तरफ बोलती हैं आज की बात को कल बोलती हैं ये हमारी खुदगर्जी समझो जो हम इनको पहचान नहीं पाए जब जाने तो ठीक से जान नहीं पाए खूब काम आए हम सभी के पर बात हमारी आई तो कोई काम नहीं आए राह बता कर बीच राह में अकेला छोड़ देती हैं ये दुनिया दोनों तरफ बोलती है आज की बात को कल बोलती हैं सुना था उम्मीद पर दुनिया कायम हैं भरोसा मजबूत बनाए रखना पर अपनी छाया के सिवा किसी पर भरोसा मत करना ये रंग बिरंगी दुनिया खुद को मेरी छाया बता भरोसा तोड़ देती हैं ये दुनिया दोनों तरफ बोलती है आज की बात को कल बोलती हैं मुकेश कुमार धोधावत 7726075950