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याद आता है ।

Bholenath sharma 26 Feb 2024 कविताएँ समाजिक याद आता है 6278 0 Hindi :: हिंदी

याद आता है , बचपन के बीते दिन                  याद आता है , गांवो में बीते दिन                 याद आता है , यारो के संग बीते दिन        याद आता है , अकेले रह नहीं पाते उनके बिन ।                                                   याद आती है , बीते हर पल कहानी ।       याद आती है , दादा - दादी के किस्से कहानी ।                                                बंध गये है पांव अब ,जिम्मेदारी के जंजीरो में ।                                                               तब पता चला , इसलिए पापा रहते इच्छा रहित त्योहारों में ।                                             हम कहते थे , वो आपका जमाना गया पापा।                                                             इस जमाने में लोगों की चप्पल है हजारो में         ।                                                               मिलते है दिहाड़ी के चार सौ ,पाँच सौं  रुपये ।                                                     तब कीमत समझ में आई जब पूरा दिन झुलसा ताप में ।                                     बहुत मुशकिल है पैसे कमाना मेहनत सें            किस मिट्टी के बने थे , वो जो रह लेते थे इतने ताप मैं ।

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