Danendra 27 Jun 2025 कविताएँ समाजिक युवा की जुबानी 22699 3 5 Hindi :: हिंदी
युवा हो तुम, ऊर्जा की पहचान हो, सोच में नई क्रांति, बदलाव की जान हो। ना वक्त गँवाओ यूँ ही बहानों में, देश पुकारे, हो जाओ मैदानों में। वक़्त है उठने का, थकने का नहीं, जोश में बहने का, मगर जलने का नहीं। ज्ञान को हथियार बनाओ, किताबों से दोस्ती करो, दुनिया को दिखा दो, तुम क्या कर सकते हो। सोशल मीडिया से ऊपर उठो, समय को सोने जैसा समझो और सहेज कर जुटो। नशा नहीं, शिक्षा चुनो, हर सुबह नए संकल्प से शुरू करो। विवेकानंद जैसा तेज हो नयन में, देश प्रेम हो हर सपने के क्षण में। "उठो, जागो और तब तक ना रुको", जब तक लक्ष्य को पा न सको। तुम हो उम्मीद, तुम हो प्रकाश, तुम बदलोगे भारत का इतिहास। बस एक कदम सच्चाई की ओर बढ़ाओ, और खुद को युवा शक्ति बनाओ।