Ramesh prajapat 30 Jan 2025 कविताएँ दुःखद दोस्ती में नशा 16527 0 Hindi :: हिंदी
कहाँ इतनी समझ जो, दोस्ती में गुणवान देखा , बस बुरे का एक ऐहसान देखा, आचरण उड़ गया बीड़ी का धुआँ बनके अमृत की तरह मैंने दोस्ती को समझा कहाँ पता था जो, नशा मेरी जवानी को उड़ा ले जायेंगा दोस्ती गलत नहीं, दोस्त गलत था मैं उस राह पर खड़ा था, जिसमें मैं करण की तरह पछताया दोस्ती की खातिर रिश्तो को भुलाया, बस दोस्ती कफ़न बन गई मेरे लिए ये दोस्ती विष बन गई मेरे लिए||