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*आंखों से आंसू क्यों निकलते हैं* *रचयिता* *अखिलेश श्रीवास्तव एडवोकेट जबलपुर * आंखों से आंसू क्यों निकलते है आत्मा दुखी हो तो आंसू निक read more >>
तोता और मैना की कहानी एक बार की बात है । एक जंगल में बड़े से पीपल के पेड़ पर एक तोता और मैना ने अपना बसेरा बना रखा था । हाल ही में बारिश का read more >>
किसी गलत ,को सही साबित करने मै बर्षो लग जाते है लेकिन , किसी सही को गलत साबित करने के लिए चंद लम्हे काफी है। read more >>
ना-मुकम्मल नही होते हर एक फसाने कुछ ख्वाहिशें ही रोकती है चीज़ों को मुकम्मल होने से पहले कुछ रास्ते ले जाते है कहानियों को अजीब मोड� read more >>
तन्हाइयों की गजलो को गुनगुनाते रहो एक दिन इन्ही को गाओगे शाम कभी देर तक फिजाओं में घूमते रहो एक दिन इन्ही वादियों के होकर रह जाओगे read more >>
कभी मुड़कर न देखना वो साए सारे जो तुम्हे खुद तुमसे जुदा करते है मे फिर किसी मोड़ पर बेकरार सा खड़ा रहूंगा कैसे रहू. तन्हा ही मिलुं� read more >>
मुझे खुदके हाल मे तन्हा छोड़ दो क्यू बस पूछो मत मे बयां नही कर सकता किस्से तमाम और क्या करोगे तुम भी जानकर ये दस्तूर है दुनिया का बदल� read more >>
जानता हूं मिलना नहीं है, यकीन है मुझे दरिया के किनारे उसी जगह घंटों गुज़ारता हूं..।। बयां क्या करूं शब्द नहीं, पुकारता हूं उसे शब्द उ� read more >>
तू आए शरमा के नज़रें झुका के ये मैं सदके तेरी इसी अदा के गर-ए-जिंदगी में मिलना तुम्हीं से महबूब मेरे-ए-पनाह तुम्हीं से जीवन-ए-सफर का त� read more >>
इतना ना सताया कर ए जिंदगी हमें ना रूलाया कर मेरे आंसु मुझे खुद ही पोंछना पड़ता है कभी तो तु मेरे आंसु पोंछने आया कर तेरे मेरी क्या दुश read more >>
कर कबुल दुआं तेरे शहर आईं हूं खोल नयन मां अब मयईहर आई हूं हाथ में पुजा के थाली लोटिया में जल भर लाईं हूं बोल न अम्बे। अब मयईहर आई हूं read more >>
मैं रात अमावस की चांद कहां होगा मेरी तकदीर में अंधेरों से रिश्ता मेरा रौशनी नहीं है मेरी नसीब में कभी कभार ख्वाबों में पूनम नजारा द� read more >>
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