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ऐसे दलदल में धंसे जा रही हूं-जिसकी कोई अस्तित्व ही नहीं

Ranjana sharma 21 Jul 2023 शायरी दुःखद ऐसे दलदल में धंसे जा रही हूं#google# 22144 0 Hindi :: हिंदी

ऐसे दलदल में धंसे जा रही हूं 
जिसकी कोई अस्तित्व ही नहीं
उस खुशी के पीछे भाग रही हूं 
जिसमे कोई खुशी ही नहीं
अपनों ने ठुकराया मुझे
तन्हा में गैरों ने लुटा मुझे 
अब जाए तो कहां जाए
कोई मंजिल नजर ना आती मुझे
                  धन्यवाद

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