Pravin Chaubey 01 Mar 2025 शायरी देश-प्रेम #shayari#kavita#poeam 30724 0 Hindi :: हिंदी
गांव की गलियों में अब भी तेरी याद बसती है,
मिट्टी की खुशबू में तेरी ही बात महकती हैं।
बरगद के पेड़ तले जो साथ बैठते थे कभी हम
अब भी वो ठंडी छांव तेरा राह पूछती है।
चौपालों में ही छुपे है कुछ अपने पुराने किस्से,
हर राह तेरे कदमों के अब निशान ढूंढती है।
- प्रवीण चौबे
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