मोती लाल साहु 31 Oct 2023 शायरी समाजिक अनमोल रत्तन मानव तन, परख ना पाया हीरा खोया वीरानों में 29751 0 Hindi :: हिंदी
"मक़सद न हो- कोई सफ़र यूंहीं, कट जाए वीरानों में!" "मक़सद- बिना यह ज़िंदगी, यूंहीं कट जाए वीरानों में!" "यह रत्तन- अनमोल मानव तन, कहीं खो गया वीरानों में!!" "परख ना पाया- लगा हाथ हीरा खोया वीरानों में!!!!" -मोती