मोती लाल साहु 06 Aug 2023 शायरी समाजिक ख़्वाबों की दुनिया और हक़ीक़त से रूबरू 20400 0 Hindi :: हिंदी
फड़फड़ाते हैं वह जो- ख़्वाबों की दुनिया में रहते हैं,, उड़ान बे आवाज़ उनकी- वो हक़ीक़त से रू-ब-रू हैं..!! -मोती
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