मोती लाल साहु 23 May 2025 शायरी अन्य मन, चंचल, खोज, प्रेरणा, आत्मज्ञान, शायरी, मोती 37031 0 Hindi :: हिंदी
ये मन चंचल- उड़े रे उड़े चाहे-जहां तीनों लोक रे ये जाए जहां- नहीं कहीं दूरी पहुंचे सकल ब्रह्मांड रे मोती कहे- मन से तेज गति नहीं जग में, वह आत्मज्ञानी बिरला जब सवारी करे ये नर मन चले- दर नारायण दर्शन अब नहीं दूरी रे -मोती