देखा मन हर्षशाया रातो मे, प्रेम की दीप जलाया साथो मे
गिरता उठता नहलाया बातो ने, उठा पटक धमा चौकड़ी हुआ सातों मे
मन का रुख काँप गया, पप्पू � read more >>
व्यंग- 2000 का नोट,!
रचना- जितेन्द्र शर्मा
तिथि- 20-05-2023
व्यंग-
परम प्रिय 2000 के नोट!
सात वर्ष की अल्पायु में आपके अवसान की सूचना मिली। इस हृदय व read more >>
हम शराबियों का गम कोई क्या समझे ,
जो दुख झेले वही समझे
अच्छे खासे थे जिंदगी में,
जी रहे थे मजे में बोतल हमारी टूट गई अब तो हम जी रहे हैं स� read more >>
बहुत गम थे जिंदगी में हमने थोड़ी सी दारू जो पीली,
अरे थोड़े पैसे कम पड़ रहे थे तो उधारी की पीली,
जब घर लौटे इलाज करवा कर अपना तब बीवी चप्� read more >>