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कभी आना... प्यारा सा गांव मेरा पहाड़ों में झरते-झरने... हवा संग बहती अमृत गांव में रोग रहते दूर खाते... हैं कंदमूल फिरते हम जंगलों में � read more >>
#विधा:_दोहा छंद #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" आया करवा चौथ है,लाया खुशी हजार। पत्नी ने पति के लिए,करी भव्य श्रृंगार।। आज करेगी चाँद का,प� read more >>
अमीर और मध्यम वर्ग में, एक अंतर यह भी है, रईसों को कुछ खरीदने से पहले, सेल लगने का,इंतजार नहीं करना होता। खरीददारी करते समय उन्हें, बार � read more >>
#विधा:_दोहा छंद #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" मुझ पर यह अहसान कर, मुझ से कर ले प्यार। और करो अधिकार भी, बनकर यूँ दिलदार।। मन से मन को मेल क� read more >>
क्षण भंगूर सा है ये मानुस, दर्पण की तरह बिखर जाये, मन मे ले जब दृढ- संकल्प, हीरे की जैसे निखर जाये, फिर भी ना जाने मुझे यहाँ, भांति भांति � read more >>
#विधा:_दोहा छंद #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" नमक छिड़कते घाव पर,ऐसे गन्दे लोग। लेते हैं तब वह मजा,जैसे उनको रोग।। नमक छिड़कते घाव पर,हो� read more >>
आंगन की रौनक खुशियों का खुमार लिखूंगी कलियों सी खिलने वाली बेटियों का संसार लिखूंगी कहने को तो मां की लाडली और पापा की परी होती है � read more >>
"कल्पना की हवा-हवाई... में कहां खो गए हम, "कल्पना ए-मन की... हवा-हवाई में खो गए हम,, "ये तन हीरा मिला कहां... ये मन के डगर खो गए हम, "ये मेरा हुआ � read more >>
"मक़सद न हो- कोई सफ़र यूंहीं, कट जाए वीरानों में!" "मक़सद- बिना यह ज़िंदगी, यूंहीं कट जाए वीरानों में!" "यह रत्तन- अनमोल मानव तन, कहीं ख� read more >>
सामने गुस्से से, डांटती, डपटती है। सोए हुए का धीरे से आ, माथा चूमती है। सामने निठल्ला, निकम्मा, कामचोर कहती है। बाहर मेरी बड़ाई करते, क read more >>
मेरे जाने का ग़म ना करना दोस्तों हंसते हंसते दे दो विदाई मुझे याद हमेशा तुम आओगे भुले से भुलाओगे कहती मेरी परछाई मुझे अलविदा अलविदा � read more >>
#विधा:_दोहा छंद #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" काटे कटी न रात अब,रहूं बड़ा बेचैन। जब से देखा हूं उसे,वही बसी है नैन।। काटे कटी न रात अब,रहत read more >>
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