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लालच जो मैं किया बुरा हुआ तब हाल-छूटा सब दोस्त है गड़बड़ है अब काल
#विधा:_मुक्तक छंद #मात्रा भार:_22(11मात्रा पर यति) #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" लालच जो मैं किया, बुरा हुआ तब हाल। छूटा सब दोस्त है,गड़बड़ है
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रहिए सदा उदार मन करिए कभी न लोभ-खुशियों की बरसात हो दूर रहे तब छोभ
#विधा:_मुक्तक छंद #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" रहिए सदा उदार मन, करिए कभी न लोभ। खुशियों की बरसात हो, दूर रहे तब छोभ। सपने सब मंसूब हो,फै�
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एक परिवार में सभी हुए अजब लाचार-सब सब को ही चाहते करते दिल से प्यार
#विधा:_दोहा मुक्तक छंद #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" एक परिवार में सभी,हुए अजब लाचार। सब सब को ही चाहते,करते दिल से प्यार। खाते कसकर खूब �
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आँखों में वही चेहरा-जम गई काजल सा
आने से उसके छा गई एक नशा, हवा भी चली कुछ अंगड़ाई लेते हूए। मन में भी हलचल हुई कुछ अजीब सा, आँखों में वही चेहरा जम गई काजल सा। धीरे-ध�
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अकबर बीरबल-अकबर राजा देश के सबसे बड़े राजा थे
अकबर राजा देश के सबसे बड़े राजा थे। जितना बड़ा उनका महल था उतने ही उनके दरबार में दरबारी भी थे। इन दरबारियों में हर तरह के बुद्धिजीवी, क
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समझो जीवन अर्थ को हमें मिला वरदान-जगत सजा संगीत से बनिए सदा सुजान
#विधा:_दोहा छंद #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" समझो जीवन अर्थ को,हमें मिला वरदान। जगत सजा संगीत से,बनिए सदा सुजान।। समझो जीवन अर्थ को,रहे
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तेरी क्या औकात है सरा हुआ है अक्ल-अब तक भी पीछे रहे करते खाली नक्ल
#विधा:_दोहा छंद #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" तेरी क्या औकात है,सरा हुआ है अक्ल। अब तक भी पीछे रहे,करते खाली नक्ल।। तेरी क्या औकात है,आए �
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जीना है तो सीख ले जीने के सब ढंग-अनुभव की जब दीप हो रहे प्रगति तब संग
#विधा:_दोहा छंद #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" जीना है तो सीख ले,जीने के सब ढंग। अनुभव की जब दीप हो,रहे प्रगति तब संग।। जीना है तो सीख ले,जी
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नारी तेरा संग हो फिर तो है आनंद-सुख दुख को हम बांट कर पिएं नित्य मकरंद
#विधा:_दोहा छंद #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" नारी तेरा संग हो,फिर तो है आनंद। सुख दुख को हम बांट कर, पिएं नित्य मकरंद।। नारी तेरा संग हो,�
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गरीबी ने मारा-गरीबी ने सारे अरमानों को जला कर राख कर दिया जिंदगी की सारी कलियाँ ही मुरझा गई
गरीबी ने सारे अरमानों को जला कर राख कर दिया, अपनों के भीड़ से सरेआम बाहर कर दिया। अपने ही समाज ने जिल्लत भरी जिंदगी है दी, जिंदगी की सा�
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अंतिम दिन बनवास का होगा रावण अंत-खुशियाँ भारत वर्ष में करते जय जय संत
#विधा:_दोहा छंद #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" अंतिम दिन वनवास का,होगा रावण अंत। खुशियाँ भारत वर्ष में,करते जय_जय संत।। अंतिम दिन वनवास �
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मन में धीरज राखिए तभी मिलेंगे नूर-श्याना बनकर हम यहां लेते रहें सरूर
#विधा:_दोहा छंद #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" मन में धीरज राखिए,तभी मिलेंगे नूर। श्याना बनकर हम यहां,लेते रहें सरूर।। मन में धीरज राखिए,
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