(मुक्तक छंद)
कभी हालात ने साथ नहीं दिया था।
कभी अपना ही हम से रूठ गया था।
त्याग की राहों मैं सतत चलता रहा_
तब जा के कहीं समर्थन मिल रहा था read more >>
कोई सहारा न मिला तो अकेले चले हम ।
कोई किनारा न मिला तो अकेले चले हम ।
सोचा इस जहां में कोई तो होगा प्यारा _
कोई प्यारा न मिला तो अकेले चल� read more >>
"नारी"
"इस धरा पर पुरुष प्रजाति ने इस धरा की हर वस्तु पर विजये हासिल की है,चाहे वो धन,सम्पति,शक्ति,ज्ञान या अधिपत्र क्यो न हो उसने इस धरा क read more >>
आदमी बनना पड़ता है। खाली जन्म आदमी कुल में लेने से नहीं हो जाता है। अपनी भावना एवम् कर्म को सादगी की राह पर रखना पड़ता है। तब जा के समाज � read more >>