न मोटर गाडियों का शोर था न मोबाइलों का दौर था
कुछ बात थी उस वक़्त में वो वक़्त ही कुछ और था।
न तो नफरत की बोली थी न देहशतगर्दो की टोली थी
ईम read more >>
(दोहा छंद)
धरती के भगवान हैं, माने तो सब जीव।
सबका ही अधिकार है, सब हैं खास अतीव।।
धरती के भगवान तो,बना रहा सुनसान।
नित संकट है सामने, डो� read more >>