आदमी बनना पड़ता है। खाली जन्म आदमी कुल में लेने से नहीं हो जाता है। अपनी भावना एवम् कर्म को सादगी की राह पर रखना पड़ता है। तब जा के समाज � read more >>
(दोहा छंद)
यही बात है सीखना, प्यास न जाने जात।
रहते कांटे फूल सह,करते मन की बात।।
प्यास न जाने जात को,मौसम करे न वैर।
सब पर एक प्रभाव दे,स read more >>